टाइम मैगजीन की पहली ‘किड ऑफ द ईयर’ चुनी गई 15 साल की गीतांजलि राव अमेरिका की टॉप यंग साइंटिस्ट अवार्ड की विनर रहने के साथ ही वह फोब्स 30 अंडर 30 की सूची में भी शामिल हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, एक- दो नहीं बल्कि पूरे 6 इनोवेशन अपने नाम कर चुकी हैं। कोलोराडो स्थित डेनवर में रहने वाली इंडियन- अमेरिकन गीतांजलि का चयन टाइम ने यूएस के 5000 नॉमिनेशंस में से किया। प्रॉब्लम्स में इंस्पिरेशन ढूंढने वाली इस टीनएज ने बचपन से ही सामाजिक बदलाव के लिए साइंस और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के बारे में सोचना शुरू कर दिया है।
प्रॉब्लम्स में ढूंढ़ती है इनोवेशन का मोटिवेशन
10 साल की उम्र में गीतांजलि ने अपनी फैमिली को यह बता कर चौंका दिया कि वे 10 डेनवर वॉटर क्वालिटी रिसर्च लैब में कार्बन नैनोट्यूब सेंसर टेक्नोलॉजी पर रिसर्च करना चाहती हैं। जब वे सातवीं में थी, तो उन्होंने पीने के पानी में लेड की भारी मात्रा की समस्या को दूर करने के लिए टीदिस नाम की डिवाइस तैयार की। यह डिवाइस पानी को टेस्ट कर स्मार्ट फोन पर उसका स्टेटस बता देती है। इस इन्वेंशन ने उन्हें 2017 का डिस्कवरी एजुकेशन 3 एम यंग साइंटिस्ट चैलेंज का विनर बना दिया। साइबर बुलीइंग रोकने के लिए काइंडली ऐप बनाया और फिर एपिवन टूल तैयार किया जो ओपिऑइड डिसऑर्डर को डायग्नोज करने में डॉक्टरों की मदद करने के लिए है।
साइंटिस्ट्स को मानती है सुपर हीरो
साइंस में खास रूचि रखने वाली गीतांजलि दुनियाभर के स्कूल्स, म्यूजियम्स और कई प्रसिद्ध संस्थानों में इनोवेशन वर्कशॉप के जरिए 28 हजार से ज्यादा स्कूली बच्चों के साथ अपने टूल्स और प्रोसेसेस को शेयर कर चुकी हैं। वह साइंटिस्ट को सुपर हीरोज का दर्जा देती है और मानती है कि जिस तरह सुपर हीरोज अपनी पावर का इस्तेमाल करके लोगों की जान बचाते हैं। साइंटिस्ट भी समस्याओं का हल निकाल कर ऐसा ही करते हैं। यहीं, वजह है कि साइंस उन्हें इतनी पसंद है और वह भी एक साइंटिफिक सुपर हीरो बनकर दुनिया की मदद करना चाहती हैं।
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टाइम मैगजीन की पहली ‘किड ऑफ द ईयर’ चुनी गई 15 साल की गीतांजलि राव अमेरिका की टॉप यंग साइंटिस्ट अवार्ड की विनर रहने के साथ ही वह फोब्स 30 अंडर 30 की सूची में भी शामिल हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, एक- दो नहीं बल्कि पूरे 6 इनोवेशन अपने नाम कर चुकी हैं। कोलोराडो स्थित डेनवर में रहने वाली इंडियन- अमेरिकन गीतांजलि का चयन टाइम ने यूएस के 5000 नॉमिनेशंस में से किया। प्रॉब्लम्स में इंस्पिरेशन ढूंढने वाली इस टीनएज ने बचपन से ही सामाजिक बदलाव के लिए साइंस और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के बारे में सोचना शुरू कर दिया है।
प्रॉब्लम्स में ढूंढ़ती है इनोवेशन का मोटिवेशन
10 साल की उम्र में गीतांजलि ने अपनी फैमिली को यह बता कर चौंका दिया कि वे 10 डेनवर वॉटर क्वालिटी रिसर्च लैब में कार्बन नैनोट्यूब सेंसर टेक्नोलॉजी पर रिसर्च करना चाहती हैं। जब वे सातवीं में थी, तो उन्होंने पीने के पानी में लेड की भारी मात्रा की समस्या को दूर करने के लिए टीदिस नाम की डिवाइस तैयार की। यह डिवाइस पानी को टेस्ट कर स्मार्ट फोन पर उसका स्टेटस बता देती है। इस इन्वेंशन ने उन्हें 2017 का डिस्कवरी एजुकेशन 3 एम यंग साइंटिस्ट चैलेंज का विनर बना दिया। साइबर बुलीइंग रोकने के लिए काइंडली ऐप बनाया और फिर एपिवन टूल तैयार किया जो ओपिऑइड डिसऑर्डर को डायग्नोज करने में डॉक्टरों की मदद करने के लिए है।
साइंटिस्ट्स को मानती है सुपर हीरो
साइंस में खास रूचि रखने वाली गीतांजलि दुनियाभर के स्कूल्स, म्यूजियम्स और कई प्रसिद्ध संस्थानों में इनोवेशन वर्कशॉप के जरिए 28 हजार से ज्यादा स्कूली बच्चों के साथ अपने टूल्स और प्रोसेसेस को शेयर कर चुकी हैं। वह साइंटिस्ट को सुपर हीरोज का दर्जा देती है और मानती है कि जिस तरह सुपर हीरोज अपनी पावर का इस्तेमाल करके लोगों की जान बचाते हैं। साइंटिस्ट भी समस्याओं का हल निकाल कर ऐसा ही करते हैं। यहीं, वजह है कि साइंस उन्हें इतनी पसंद है और वह भी एक साइंटिफिक सुपर हीरो बनकर दुनिया की मदद करना चाहती हैं।
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